ईमानदारी
जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर सत्य और सही आचरण को महत्व देना।
साधु चरण सिंह का जीवन संघर्ष, शिक्षा, ईमानदारी, ज्ञान और परिवार के प्रति समर्पण की ऐसी यात्रा है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
28 जुलाई 1934 को शिलांग में जन्मे साधु चरण सिंह का बचपन मुख्य रूप से बहुआरा में बीता। उनके पिता असम में कार्यरत थे और बचपन में उन्हें उनकी बड़ी माँ, जिन्हें परिवार में ‘बड़की माई’ कहा जाता था, का गहरा स्नेह मिला।
सीमित साधनों के बीच शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं था। विद्यालय तक लंबी दूरी पैदल तय करना, साधारण भोजन साथ ले जाना और कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करना उनके बचपन का हिस्सा रहा। फिर भी पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण लगातार बढ़ता गया।
शिक्षा के बाद उन्होंने अध्यापन का कार्य किया और आगे चलकर लोक सेवा में प्रवेश किया। 1960 में उन्होंने PCS परीक्षा दी और चयनित हुए। जून 1962 में उन्होंने वाराणसी जिला कोषागार में अपनी सरकारी सेवा प्रारंभ की।
जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर सत्य और सही आचरण को महत्व देना।
कठिन परिस्थितियों को रुकावट नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाना।
गणित, इतिहास और सीखने की निरंतर जिज्ञासा को जीवन का हिस्सा बनाना।
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक प्रेम, संस्कार और स्मृतियों को आगे बढ़ाना।
यह वेबसाइट केवल स्मृतियों का संग्रह नहीं है। इसका उद्देश्य उस जीवन से मिले मूल्यों, अनुभवों और सीख को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है। परिवार की नई पीढ़ियाँ इस विरासत में अपने परिचय, तस्वीरें और अपनी स्मृतियाँ जोड़ती रहेंगी।